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एक दूजे के लिए…..भाग-3

रश्मि सो रही होती हैं। तभी फोन बजता हैं। वो सोए हुए में ही फोन उठा लेती हैं।

हैलो कौन?
मैं हूँ यार रीना। इतनी जल्दी भूल गई क्या?
अरे नहीं वो सो हुई थी तो ध्यान नहीं दिया। तू बता कैसी हैं?
मैं ठीक हूँ। बस रिजल्ट का इंतजार हैं।
हाँ, यार मुझे भी। वैसे भी शायद हमें यहाँ से जाना पडे़।
कहाँ जाना हैं तूने? रीना ने कहा।
पापा का तबादला हो सकता हैं। तो हमें जाना पडे़गा ना।
हाँ, वो तो हैं। यार तू चली जाएगी तो मेरा क्या होगा? रीना ने उदास होते हुए कहा।
क्या करे अब। जाना तो पडे़गा ना यार। मैं तुझे बहुत याद करूँगी। पता नहीं कहाँ जाना पडे़गा। कैसे लोग होगे वहाँ? रश्मि ने कहा।
हाँ, वो तो हैं। पर क्या करें। कुछ कर भी नहीं सकते। अच्छा जब रिजल्ट आ जाए तो बता देना।
हाँ, बता दूँगी। अगर तुझे पहले पता चल जाए तो मुझे बता देना। रश्मि ने कहा।
ठीक हैं। अच्छा मैं अब फोन रखती हूँ। ख्याल रखना अपना।
हाँ, तू भी। ऐसा कह कर रश्मि फोन रख देती हैं।

देहरादून शहर-

रेहान- कहाँ मर गए ये साले दोनों के दोनों। मुझे इस तपती धूप में खडा़ रहना पड़ रहा हैं उनकी वजह से। आने दो इन को जरा। खबर लेता हूँ इनकी।

आधे घंटे के बाद
रेहान- इतनी देर हो गई। कहाँ रह गए आज। लगता हैं अब इन्हें फोन ही करना पडे़गा। रेहान फोन लगाता हैं जेहन को।

जेहन- कौन फोन कर रहा हैं इस वक्त? जेहन फोन देखता हैं। अरे, मर गए आज तो बुरी तरह। रेहान भाई का फोन। लगता हैं सुनामी आने वाली हैं। फोन उठाऊँ या नहीं। नहीं उठाया तो मुझे उठा देंगे। इससे अच्छा हैं उठा ही लेता हूँ।
जेहन फोन उठाता हैं।

रेहान- कहाँ मर गए आज तुम दोनों। कब से इंतजार कर रहा हूँ तुम सबका इस चिलचिलाती गर्मी में। टोस्ट बन गया हूँ पूरा।

जेहन- भाई, सैंडविच और ठंडा भेजता हूँ साथ में आपके लिए।

रेहान- देख जेहन मुझे गुस्सा मत दिला। कितने बजे का समय दिया था तुम दोनों को?

जेहन- 11बजे।

रेहान- और कितना समय हो गया?

जेहन- 11:30।

रेहान- तो फिर।

जेहन- भाई, मेरी कोई गलती नहीं हैं। वो मैं तो दमन के घर हूँ।

रेहान- तो तू वहाँ क्या कर रहा हैं ?

जेहन- भाई, वो दमन ने बुलाया था कि साथ में चलेंगे।

रेहान- दमन कहाँ हैं फिर?

जेहन- भाई, भाई…

रेहान- आगे भी बोलेगा अब?

जेहन- दमन तो बाथरूम में हैं भाई।

रेहान- फोन दे तू उसको।

जेहन- ठीक हैं भाई देता हूँ । जेहन बाथरूम के बाहर खडा़ हो जाता है। दमन जल्दी कर।

दमन- क्या हुआ तुझे। कौन सी इमरजेंसी हो गई अब।
जेहन- ऐसा ही समझ ले कुछ। तूफान आ गया तूफान। ले फोन पकड़।

दमन- हैलो, रेहान। क्या हुआ?

रेहान- बर्फ पड़ रही हैं। पकौडै़ ले के आ जा।

दमन- क्या बात कर रहा हैं यार।

रेहान- 15 मिनट में यहाँ पहुँच जाओ। नहीं तो तुम्हारे पकौडै़ बना के तलूँगा मैं।

शेष आगे के भाग में….!!




लेखक: शशि रावत

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