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तुम्हारा शर्माते हुए नजरें चुराना

खिली-खिली शाम, खुला आसमां, आसमान में बेधड़क उड़ते पंछी, सूरज की डूबती किरणें, दूर-दूर तक दिखते पर्वत, शीत भरा वातावरण, खुशनुमा माहौल और…. हम्म्म्म्म… तुम हो ना पास मेरे.

चहचहाते पंछी, सुरमई कोयल की आवाज़ें, तुम्हारी मीठी-मीठी प्यारी-प्यारी बातें, जिसे सुनकर ज़ी मेरा बस तुम्हें ही देखने और तुमसे ही बातें करने को मचल रहा है. कुछ नटखट हरकतें तुम्हारी बच्चों जैसी, पागलपन करने को आतुर तुम्हारे मन आज खुशी से झूम रहे हैं.

तुम्हारा चेहरा यूं खिला सा है मानो समंदर में एक भयानक तूफान आया और आकर चला भी गया हो जिसके अभी जाते ही समंदर शांत सा हो गया हो और बड़ी ही प्यारी मुस्कान सी उभर आई हो. तुम्हारी ये मुस्कान यूं दिख रहे हैं मानो बर्फ की हल्की-हल्की फुहारें गिर रही हो शर्द आसमां से. तेरे चेहरे की चमक इतनी शीतल है कि ऐसा लग रहा मुझे चांद आसमां से उतर मेरे ही लिए वो पास करीब मेरे आया है. क्या कहूँ तुम्हें क्या हो तुम मेरे लिए, नजरें मेरी तुमसे हट ही नहीं रहीं.

तुम्हारा शर्माते हुए नजरें चुराना, सोखियां बिखेरे तेरे काले बाल जो बार-बार तेरे शर्माने पर झुक कर तेरे चेहरे पर आ जाते हैं जिन्हें तुम फिर से अपने कानों पर समेट लेती हो, तेरा बोलते हुए अचानक रूक कर मुझे देखना और बस देखे जाना और देखकर तेरा मुस्कुराना….!!

इन सारी बातों को खुद में समेट लेना चाहता हूँ और तेरी प्यारी हरकतें को एक याद बनाकर जीना चाहता हूँ गर संग तेरे कुछ पल ना रह पाऊं तो है ना तेरी बातें पास मेरे जिन्हें याद कर जी लूंगा मैं.

PC: Juliette Schirru (Flikr)




लेखक: हिमांशु मयंक

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