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वादे साथ निभाने के जो उन्होंने बखूबी निभाये

“क्या कर रहे हो तुम? दूर रहो मुझसे, पास मत आओ मेरे. क्या… क्या लगते हो तुम मेरे?”,
आँखों में आँसू पर चेहरे पर प्यार जताते हुए उसने मुझसे ये बातें बोली.
“मुझे माफ कर दो, आइंदा से ऐसी गलती नहीं होगी मुझसे “, अपने दोनों हाथों से कानों को पकड़ कर मैंने कहा.
“जाओ, तुम हमेशा से ऐसा करते हो माफी भी मांग लेते हो. तुम्हें पता है कि मैं तुम्हारे मनाने पर तुरंत मान भी जाती हूँ, इसलिए तुम गलती कर मुझे मनाने आ जाते हो.”, मेरे करीब आते हुए एक रोते हुए बच्चे की तरह वो बोली.
फिर उसने मुझे अपने सामने बिठाया और मेरे चेहरे पर अपने दोनों हाथों को रखकर बड़े ही प्यार से मुझसे बोली, “मैं कितना भी दूर तुमसे जाना चाहूं पर तुम्हारा ये जो प्यारा सा मुखड़ा है बस इसी को देख मेरा दिल पिघल जाता है, और आज मैं तुम्हें एक बात कहने जा रही हूँ क्या तुम सुनोगे. ”
मैंने कहा, ” कौन-सी बातें हैं, बताओ मैं जरूर सूनुंगा. ”
वो आँखों में आँसू लिए बड़े ही प्यार से बोली, “तुम यूं ही मेरे साथ रहना, मैं हर लम्हे को तुम्हारे साथ जीना चाहती हूँ, अगर मौत भी मिले अगर मुझे तो तेरे ही बाहों में.”

मैं भी उससे हमेशा कहा करता था, “मैं साथ तेरा कभी ना छोड़ूंगा. ”

पर वो वक्त कुछ और था, आज वक्त कुछ और है, आज जो मंजर है मेरे सामने वो मैं हाल-ए-बयां कैसे करुं, मेरी आँखें ही नहीं मेरा दिल भी रो रहा है आज.

जा चुके हैं दूर वो सारे वादे को निभाकर,
पर एक वादा ना निभा सके जो किए थे उसने
साथ जीवन भर निभाने का.

बीच सफर में साथ छोड़ गये,
मौका भी ना दिया मुझे
प्यार मेरे दिल के दिखाने का,
पर वो जाते-जाते बयां कर गये
मुहब्बत अपनी, बाहों में मेरी।

जाते-जाते एक बात जरुर कहना चाहुंगा उसे –

ताउम्र प्यार करने की कसमें खाईं थी उसने,
आखिरी साँस तक प्यार भी किए उसने,
आज जब बाहों में मेरी आखिरी साँस ले रहे थे अपनी,
मैं कह ना सका कि कितना प्यार है उससे।

निभाते रहे वादे, पूरी की हर कसमें,
दिल की जो ख्वाहिश थी उसकी,
जो शायद पूरा आज कर पाया मैं ।

लेखक: हिमांशु मयंक

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