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“समाजवाद पर भारी परिवारवाद”

समाजवादी विचारधारा के पोषक और भारतीय राजनीति के मजबूत स्तम्भों में से एक डॉ राम मनोहर लोहिया जी भारत के प्रमुख समाजवादी विचारक , राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे । संसद में सरकार के अपव्यय पर कि गयी उनकी बहस " तीन आना-पंद्रह आना" आज भी प्रसिद्ध है !

आओ नई शुरुआत करें : नववर्ष विशेष

आने वाला पल आयेगा खुशियों से दामन भर जायेगा कुछ नये समाचार मिलेंगे खुशियां हर पल अपार मिलेंगे भूल कर बीती बातें आओ नई शुरुआत करें नये से इस साल में नई-नई बात करें बीते हुए पल, बीती हुई बातें आओ चलो सारे भूला दें क्यों ना हम नये साल में

सच्चे प्यार को शादी जैसे रस्मों की जरूरत नहीं पड़ती

सच्चे प्यार को शादी जैसे, रस्मों की जरूरत नहीं पड़ती, वरना "कृष्ण-राधा" का नाम, यूँ ही न लिया जाता, सदियों तक...।।। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); लेखक: शशि रावत loading... var SC_CId = "222858",SC_Domain="n.ads2-adnow.com";SC_Start_222858=(new Date).getTime();

अखिलेश की इमेज को बेहतर बनाने के लिए झगड़ा ज़रूरी : US एडवाइजर की मेल से खुलासा

पिछले कुछ दिनों से सपा में अंदरूनी चले आ रहे झगडे का मकसद सिर्फ अखिलेश यादव की इमेज को बेहतर बनाने वाला एक दिखावा है. दरअसल बात ये है की सपा के पब्लिक रिलेशन मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार मशहूर पॉलिटिकल स्ट्रैटजिस्ट और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर स्टीव जार्डिंग की एक लीक

सपा में छिड़े दंगल का क्लाइमैक्स…पार्टी से बाहर किये गए राम गोपाल और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

सपा सुप्रीमो ने अपने भावुकतापूर्ण मुद्रा में संबोधन करते हुए आज आखिरकार सपा के आंतरिक दंगल का क्लाइमेक्स लाते हुए ये ऐलान कर दिया की पार्टी के सदस्य राम गोपाल यादव और मौजूद मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव को 6 साल के लिए बाहर कर दिया। सपा मुखिया ने सबसे पहले रामगोपाल

अपनों की जरूरत और ये नोटबंदी

हैलो, दीदी तुम कैसी हो ? सरला में ठीक हूँ। तुम कैसी हो ? दामिनी ने कहा। मैं भी ठीक हूँ दीदी। सरला ने कहा। और बताओ आश्रम में सब ठीक हैं ? दामिनी ने पूछा। हाँ दीदी सब ठीक हैं। आप बताओ आप कैसे हो ? सरला ने पूछा। हाँ मैं अच्छी हूँ सरला।

यूं ही जब कोई तुझ सा

यूं ही जब कोई तुझ सा सामने मेरे आ जाता है उसे देखने को मैं पीछे उसके चला जाता हूँ सोचता मैं हूँ तू ही होगी शायद गर होगी जो तुम बताऊँगा हालात मैं दिल की यूं ही जब कोई तुझ सा.... ये नैन मेरे तरस-तरस गये मेरे नैन बरस-बरस गये जिस पल तू साथ

तू मेरी, सिर्फ मेरी बन जा

तेरे नैना काफिर बनाये मुझे मुस्कुराना तेरा छू जाये मुझे तू जब मेरे सामने आये मेरी धड़कन सीने में थम जाये तुम्हें देख नैन मेरे खुशियों से भर आये तू रूक जाना मेरे लिए थम सा जायेगा ये पल सारा तुम्हारे लिए ही तो मैं हूँ गहरी नींद से जागा अब तो

इक सुबह ऐसी भी आएगी

"इक सुबह ऐसी भी आएगी, जब अंधेरों की चादर ओढ़े , रोशनी मरे गले लग जाएगी | बेखुदी से प्यार करूँगा मैं उसको , जब उसकी गर्म सांसें , मेरी गर्म सांसों में समा जाएंगी |

वो अब भी उसका पीछा करता हैं

आखिर तुम मुझसे चाहते क्या हो ? रश्मि ने गुस्से में पूछा। मैं तुमसे प्यार करता हूँ , कमल ने कहा। लेकिन मैं नहीं करती तुमसे प्यार। मैं अपनी जिंदगी में अब आगे बढ़ चुकी हूँ काफी। मैं किसी और से प्यार करती हूँ। रश्मि ने परेशान होते हुए कहा। तुम

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